pollution

सोमवार, 20 अप्रैल 2026

पर्यावरण प्रदूषण के प्रमुख कारण

 

पर्यावरण प्रदूषण के प्रमुख कारण

🌫️ 1. वायु प्रदूषण (Air Pollution)

वायु प्रदूषण आज के समय की सबसे बड़ी समस्याओं में से एक बन चुका है। गाड़ियों का धुआं, फैक्टरियों से निकलने वाला धुआं और कूड़ा जलाना इसके मुख्य कारण हैं। इसके कारण हवा की गुणवत्ता खराब हो रही है, जिससे लोगों को सांस लेने में दिक्कत होती है।



इसका सीधा असर मानव स्वास्थ्य पर पड़ता है। अस्थमा, फेफड़ों की बीमारी और अन्य सांस से जुड़ी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। बड़े शहरों में यह समस्या और भी गंभीर हो चुकी है।


🌊 2. जल प्रदूषण (Water Pollution)

जल प्रदूषण भी एक गंभीर समस्या बन चुका है। फैक्टरियों का गंदा पानी, प्लास्टिक कचरा और घरेलू अपशिष्ट नदियों और महासागरों में मिल रहा है। इससे पानी दूषित हो रहा है और पीने योग्य नहीं रह जाता।

इसका असर केवल इंसानों पर ही नहीं, बल्कि जलीय जीवों पर भी पड़ता है। मछलियाँ और अन्य जीव इस प्रदूषण के कारण मर रहे हैं, जिससे पारिस्थितिकी तंत्र बिगड़ रहा है।


🌳 3. वनों की कटाई (Deforestation)

वनों की अंधाधुंध कटाई पर्यावरण के लिए बहुत हानिकारक है। पेड़ों की संख्या कम होने से ऑक्सीजन की मात्रा घट रही है और कार्बन डाइऑक्साइड बढ़ रही है।

इसके कारण ग्लोबल वार्मिंग की समस्या बढ़ रही है। साथ ही, वन्य जीवों का प्राकृतिक आवास भी नष्ट हो रहा है, जिससे कई प्रजातियां विलुप्त होने की कगार पर हैं।


🌡️ पर्यावरण क्षति के प्रभाव

पर्यावरण को हो रहे नुकसान के कई गंभीर प्रभाव देखने को मिल रहे हैं:

  • तापमान में लगातार वृद्धि हो रही है
  • ग्लेशियर तेजी से पिघल रहे हैं
  • बाढ़ और सूखा जैसी प्राकृतिक आपदाएं बढ़ रही हैं
  • मानव स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है

पर्यावरण का नुकसान केवल प्रकृति तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सीधे तौर पर इंसान की जिंदगी को प्रभावित करता है। अगर समय रहते कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले समय में स्थिति और भी गंभीर हो सकती है।

बड़े शहरों में यह समस्या और भी गंभीर हो चुकी है।”

जैसे दिल्ली और मुंबई जैसे शहरों में यह समस्या ज्यादा देखने को मिलती है।”


जानें कि पर्यावरण मानव जीवन के लिए क्यों महत्वपूर्ण है और हम इसे आसानी से कैसे सुरक्षित रख सकते हैं।

  हमारे जीवन में पर्यावरण का महत्व


जानें कि पर्यावरण मानव जीवन के लिए क्यों महत्वपूर्ण है और हम इसे आसानी से कैसे सुरक्षित रख सकते हैं।


परिचय


पर्यावरण हमारे जीवन का एक मूल आधार है जो। स्वच्छ हवा, पानी और भोजन सब पर्यावरण से मिलता है। लेकिन फिर भी आज के समय में प्रदूषण या ग्लोबल वार्मिंग की वजह से पर्यावरण को बहुत ज्यादा नुक्सान हो रहा है।  या अगर हमने अभी भी कोई कदम नहीं उठाया, तो आने वाली पीढ़ी के लिए बहुत बड़ी समस्याएं बढ़ जाएंगी।



पर्यावरण क्यों महत्वपूर्ण है


पर्यावरण हमें इवान जीने के लिए बहुत जरूरी संसाधन देता है।  जैसे कि ऑक्सीजन, पानी और प्राकृतिक संतुलन सब इसी पर निर्भर करता है। या अगर पर्यावरण हमारा सुरक्षित होगा तभी मानव जीवन हमारी स्वस्थ रहेगी।



पर्यावरण को प्रभावित करने वाली समस्याएँ


प्रदूषण, वनों की कटाई और प्लास्टिक कचरा जो सबसे बड़े कारण हैं। वायु प्रदूषण से सबसे ज्यादा स्वास्थ्य समस्याएं खराब हो रही हैं और जल प्रदूषण से सबसे ज्यादा बीमारियां फेल हो रही हैं।


समाधान


पेड़ लगाना, प्लास्टिक को कम उपयोग करना या पानी बचाना दिन प्रतिदिन बहुत महत्वपूर्ण है। या जैसे सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करना भी प्रदूषण को कम करता है।


निष्कर्ष


पर्यावरण को बचाना हम सब की जिम्मेदारी है। आज के प्रयास ही कल भविष्य को सुरक्षित बनाएंगे।

गुरुवार, 30 मई 2024

वायु प्रदूषण तथा वायु माण्डिल्य समस्या Air Pollution and Air Condition Problems


वायु प्रदूषण तथा वायु माण्डिल्य समस्या 

वायु प्रदूषण से जहा एक ओर सज सामान पौधे तथा प्राणियों के समुदाय को छाती पहुँचती है एवं मनुष्य में स्वष्थ सम्बन्थित समस्या खड़ी  होती है व्ही दूसरी और वायु मंडलीय प्रक्रिया में भी परिवर्तन आते है अम्ल वर्षा धूम कोहरा वैश्विक उसमाँ ओजोन रिक्तीकरण आदि कुछ ऐसे ही प्रभाव है जो हमारे वायुमंडल में प्रदुषण के कारन हो रहे है अये वायुमंडल में वायु प्रदूषण के कारन होने वाले कुछ समाया पर एक नजर डाले 

निलंबित करणीय पदार्थ 

आस पास की हवा में पाए जाने वाले करणीय पदार्थ विभिन्नय आकर में कणो का जिनमे अनेक रसायनिक घटक भी हो सकते है एक मिश्रित होता है एवं इसका मिश्रण अदालत बदलता रहता है इनमे से भट्टर कारण हमरी नक् के भीतर के बाल में तथा स्वाश के नालियों में अटक जाते है १० मम से भी छोटे आकर के कर्ण जिन्हे हम प.म १० कहते है स्वशाननील निलंबित करणीय पदार्थ कहलाते है सबसे कहते कारण २.५ मम से भी आकर में काम होते है जिन्हे पम २.५ कहते है ये स्वाश द्वारा फेफड़े में गहराई तक चले जाते है और बहुत सी परेशानिया पैदा करती है केन्दीय प्रदुषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा हल के वर्षो में कुछ भारतीय शहरो की परिवेशीय गुणवत्ता के अध्यन से पता चलता है की कई भारतीय शहरो जैसे रायपुर कानपूर दिल्ही गवळीवर तथा लुधियाना में र.स.प.म २०० माइक्रो ग्राम प्रति क्यूबिक मीटर से अधिक है 

अम्ल वर्षण 

अम्ल वर्षा तथा अम्ल वर्षण में विभिन्नय प्रकार के आदर्श  निपक्ष निम्मनलिखित है जैसे की वर्षा हिमपात कोहरा अथवा ओस तथा वायु से गिरने वाले शुष्क अम्लीय करणीय अम्ल वर्षं ऐसे छेत्री में अथवा उनके आस पास होता है जहा मानव जनित क्रियाकलाप के परिदम्स्वरूप सल्फर डाइऑक्साइड तथा नाइट्रोजन के आक्साइड के मुख्य निरसरण है कोयले से चलने वाले बिजली घर में से निकलने वाला हाइड्रोक्लोरिक  अम्ल भी  वर्षा की समायो  देते है 


 Air Pollution and Air Condition Problems


On one hand, air pollution harms the plant and animal community and creates health related problems in humans, on the other hand, changes also come in the atmospheric processes. Acid rain, smog, global warming, ozone depletion etc. are some of the effects that are happening due to pollution in our atmosphere. Let us have a look at some of the problems caused by air pollution in the atmosphere.



Suspended Particulate Matter

The particulate matter found in the surrounding air is a mixture of particles of different sizes which may also contain many chemical components and their mixture keeps on changing. Most of these particles get stuck in the hair inside our nose and in the respiratory tract. The particles of size smaller than 10 mm, which we call PM10, are called suspended particulate matter. The smallest particles of size less than 2.5 mm, which are called PM2.5, are exhaled through breathing. These go deep into the lungs and cause many problems. The study of ambient quality of some Indian cities done by the Central Pollution Control Board in recent years shows that many Indian cities like Raipur, Kanpur, Delhi, Gwalior and Ludhiana have PMO more than 200 micrograms per cubic meter.


Acid Rain


The different types of acid rain and acid precipitation are as follows: Rain, snow, fog or dew and dry acid rain falling from the air. Acid rain occurs in or near areas where there is significant emission of sulphur dioxide and oxides of nitrogen as a result of anthropogenic activities. Hydrochloric acid released from coal-fired power plants also contributes to rain.

बुधवार, 29 मई 2024

वन एक संसाधन के रूप में Forest as a Resource



वन एक  संसाधन के रूप में  


  वन एक  संसाधन के रूप में   

वन हमारी सम्पदा है जो हमें विविध प्रकार के उत्पादन जैसे इमारती लकड़ी जलावन की लकड़ी चारा फाइबर रेष जड़ीबूटियां सौन्दर्य प्रसंसन और अनेक प्रकार की सामग्री कच्चा मॉल प्रदान करता हैं जिसका उपयोग उद्योग में होता है अनेक विविध प्रकार के ाशधन धरी जिव और पक्षी जो वनो में रहते है उपयोगी सजीव संसाधन का काम करते है वन मृदा निर्माण जल संरक्षण और आक्सीजन के पुर्नउत्पादन में प्रमुख भूमिका निभाते है वृक्ष अपनी जिव मात्रा में (सीओ२ का योगीकरण करते है और वाष्पोत्सर्जन के द्वारा वे जल वायु को माध्यम स्टार पर बनाय रखते है क्या आप कल्पना क्र सकते है की अगर दुनिया में वन नहीं रहेंगे तो क्या होगा ये अनेक कार्य करते है जिन्हे प्रतक्ष्य रूप से देखा जा सकता है लेकिन कुछ कार्य ऐसे है जिन्हे प्रतक्ष्य रूप से नहीं देखा जा सकता है जैसे की वायु का शुद्धिकारन कार्बन सिंक व्यापक रूप से वनो द्वारा किय जाने वाले सभी कार्यो को तीन शीर्षकों में वर्गीकृत किया जा सकता है आर्थिक ,पारिस्थितिकीय और सामाजिक।

आर्थिक महत्व

वन पृथ्वी ग्रह पर उपलब्ध सबसे बड़ा नवीकरणीय संसाधन हैं। वे भोजन, पशु चारा और ईंधन सहित कई तरह की वस्तुएँ और सेवाएँ प्रदान करते हैं। लकड़ी का उपयोग घर, फर्नीचर, माचिस, हल, पुल और नाव बनाने के लिए किया जाता है। टैनिन, गोंद, मसाले, मोम, शहद, कस्तूरी और पशु चारा जैसे वन उत्पाद वनों के सभी जानवरों और पौधों की प्रजातियों द्वारा प्रदान किए जाते हैं। पेड़ों के फल, पत्ते, जड़ें और कंद वन में रहने वाली जनजातियों के लिए भोजन हैं। लकड़ी और बांस के गूदे का उपयोग कागज और रेयान बनाने के लिए किया जाता है।


Forest as a Resource Forests are our wealth which provide us with a wide variety of products such as timber, firewood, fodder, fibre, fibre, herbs, beauty products and a variety of raw materials which are used in industry. A wide variety of terrestrial animals and birds which live in forests serve as useful living resources. Forests play a major role in soil formation, water conservation and reproduction of oxygen. Trees fix CO2 in their living quantities and through transpiration they maintain the atmosphere and water at the medium level. Can you imagine what will happen if there are no forests in the world? They perform many functions which can be seen directly but there are some functions which cannot be seen directly such as purification of air, carbon sink. Broadly, all the functions performed by forests can be classified under three headings, economic, ecological and social.

Economic importance 

Economic importance   is the largest renewable resources available on the planet Earth. They provide many types of items and services including food, animal feed and fuel. Wood is used to make homes, furniture, matches, plows, bridges and boats. Forest products such as tannins, glue, spices, wax, honey, musk and animal fodder are provided by all animals and plant species of forests. The fruits, leaves, roots and tubers of trees are food for tribes living in the forest. Wood and bamboo pulp is used to make paper and rayon.




शुक्रवार, 6 अक्टूबर 2023

पर्यावरण पर निबंध environmentessay



 प्रस्तावना 

पर्यावरण शब्द परि + आवरण से मिलकर बना है परि का अर्थ है चारों ओर और आवरण का अर्थ है घिरा हुआ। अर्थात पर्यावरण का शाब्दिक अर्थ है चारों ओर से घिरा हुआ । जैसे नदी ,पहाड़, तालाब, मैदान, पेड़-पौधे, जीव-जंतु वायु वन मिट्टी आदि सभी हमारे पर्यावरण के घटक है। हम सभी इन घटको का दैनिक जीवन में भरपूर उपयोग करते है अर्थात हम इन घटको पर ही निर्भर है।

preface

The word environment is made up of the angel + cover. Pari means surrounded and cover means surrounded. That is, the literal meaning of environment is surrounded from all sides. Such as rivers, mountains, ponds, plains, trees, plants, animals, air, forest, soil, etc. are all components of our environment. We all use these components a lot in daily life, that is, we are dependent on these components.




पर्यावरण और प्राकृतिक 

सभी प्राकृतिक वातावरण जैसे की भूमि, वायु, जल, पौधे, पशु हो। सामग्री कचरा, धूप, जंगल, हरियाली, खेत, खलिहान और अन्य सभी प्राकृतिक वस्तु को प्राकृतिक वातावरण कहा जाता है। हमारे आस पास के प्राकृतिक संसाधन की वजह से हमारा जीवन सम्पूर्ण होता है या यह कह सकते है कि हमारा जीवन बिना प्राकृतिक संसाधनों के असंभव है। प्रकृति का स्वस्थ होना मानव के जीवन का सबसे अहम भाग है। स्वस्थ वातावरण पर्यावरण को संतुलित बनाए रखने में बहुत योगदान देता है।पृथ्वी पर सभी जैविक और अजैविक चीजों जैसे की पेड़, झाड़ियों, बगीचा, नदी, झील, हवा, धूप की किरण आदि शामिल है। स्वस्थ वातावरण प्रकृति के संतुलन को बनाए रखता है और साथ ही साथ पृथ्वी पर सभी जीवित चीजों को बढ़ने, पोषित और विकसित करने में मदद करता है। लेकिन आज के समय के अनुसार औद्योगिक क्षेत्र की उन्नति के परिणाम स्वरूप मानव निर्मित प्रदूषण को कई प्रकार से विकृत कर रहा है जो कि प्राकृतिक के संतुलन को बिगाड़ कर रख रही है। यदि कोई भी व्यक्ति प्रकृति के अनुशासन को खराब करते हैं तो ये पूरे वातावरण के माहौल को जैसे की वायु-मंडल, जलमंडल और स्थलमंडल को अस्तव्यस्त करती है। मानव निर्मित वातावरण इस पर्यावरण को काफी हद तक प्रभावित करता है जिसे हम सभी को पेड़ पौधे लगा कर बचना है और लोगों को वृक्ष लगाने के लिए उकसाना है।प्राकृतिक वातावरण को घटक संसाधन के रूप में उपयोग किया जाता है हालाँकि कुछ बुनियादी भौतिक जरूरतें और जीवन के उद्देश्य को पूरा करने के लिए इंसान द्वारा इसका शोषण किया जाता है। पर्यावरण में वायु प्रदूषण, जल प्रदूषण, मृदा प्रदूषण आदि को रोकने के लिए कठोर से कठोर नियम लागू करना चाहिए और सभी आम जनता को इधर उधर अपशिष्ट डालने में रोक लगानी चाहिए।

Environment and Natural

All natural environments such as land, air, water, plants, animals. Material garbage, sunlight, forest, greenery, farm, barn and all other natural objects are called natural environments. Due to the natural resources around us, our life is complete, or it can be said that our life is impossible without natural resources. The health of nature is the most important part of human life. A healthy environment contributes a lot in keeping the environment balanced. All the biotic and abiotic things on earth such as trees, shrubs, garden, river, lake, wind, sunlight rays, etc. are included. Healthy environment maintains the balance of nature and at the same time helps all living things on earth to grow, nurture and develop. But according to today's time, the industry




उपसंहार 

आज के युग मे पर्यावरण प्रदूषण बहुत तेजी से बढता जा रहा है क्यो कि बढती हुई जनसख्या  के कारण मानव पेड पौधे और वनो को काट कर  बडी बडी इमारते बना रहा  है और बडी बडी  इमारते बना रहा है  और  बडी बडी कम्पनियां  जिसमे से काला धुआ जहरीली गैस और गंदा पानी  यह पर्यावरण को प्रदूषित करने मे अहम हिस्सा हैं गाडी से निकलने वाला धुआ और गैस जो कि वायु प्रदूषण ध्वनि प्रदूषण और जल प्रदूषण लगातार हो रहा है जिसके कारण मनुष्य को निम्न प्रकार कि बिमारीयो का सामना करना पड रहा है पर्यावरण के लगातार प्रदुषण होने के कारण मनुष्य के साथ छोटे बडे जीव जतुं सभी संकठ मे है आने वले समय मे यदि मनुष्य पर्यावरण के लिए जागरुक नहीं हुआ तो इस धरती पर जीवन संभव नहीं है ।

conclusion

In today's era, environmental pollution is increasing very fast because due to increasing population, humans are cutting down trees and forests and making big buildings and big buildings and big companies out of which black smoke, poisonous gas and dirty water are an important part in polluting the environment. Pollution and water pollution are constantly happening Due to which humans are facing the following types of diseases, due to continuous pollution of the environment, all small and big organisms along with humans are in danger.




जीवन के लिए पर्यावरण का महत्व 

जीव चाहे किसी भी प्राकार के पर्यावरण मे रहते हो सभी को अपनी उत्तरजीवीका के लिए जीवन र्निवह के लिए आवश्यक तत्वों कि अवश्यकता होती है इनमे वायु जिससे हम सास लेते है भोजन और जल जिन्हे हम ग्राहण करते हैं और आश्रय चाहे प्राकृतिक  (गुफाए और वृक्षो मे बने घर)  अथवा कृत्रिम आवास  जैसे (माकान)  सम्मिलित है पर्यावरण एक मात्र ऐसा स्रोत है जो इन जीवन समथरन करने वाले तत्वों को प्रादान करता है ।


Importance of environment for life

 No matter what kind of environment the organisms live in, everyone needs the necessary elements for their survival for their survival, including the air from which we breathe, the food and water that we consume and shelter, whether natural (houses built in caves and trees) or artificial habitats (houses), the environment is the only source that provides these life-supporting elements.











रविवार, 24 सितंबर 2023

पर्यावरण पर्यावरण का अर्थ प्राकृतिक वातावरण

 पर्यावरण का अर्थ

 पर्यावरण शब्द परि + आवरण से मिलकर बना है परि का अर्थ है चारों ओर और आवरण का अर्थ है घिरा हुआ। अर्थात पर्यावरण का शाब्दिक अर्थ है चारों ओर से घिरा हुआ । जैसे नदी ,पहाड़, तालाब, मैदान, पेड़-पौधे, जीव-जंतु वायु वन मिट्टी आदि सभी हमारे पर्यावरण के घटक है। हम सभी इन घटको का दैनिक जीवन में भरपूर उपयोग करते है अर्थात हम इन घटको पर ही निर्भर है।




प्राकृतिक वातावरण

सभी प्राकृतिक वातावरण जैसे की भूमि, वायु, जल, पौधे, पशु हो। सामग्री कचरा, धूप, जंगल, हरियाली, खेत, खलिहान और अन्य सभी प्राकृतिक वस्तु को प्राकृतिक वातावरण कहा जाता है। हमारे आस पास के प्राकृतिक संसाधन की वजह से हमारा जीवन सम्पूर्ण होता है या यह कह सकते है कि हमारा जीवन बिना प्राकृतिक संसाधनों के असंभव है। प्रकृति का स्वस्थ होना मानव के जीवन का सबसे अहम भाग है। स्वस्थ वातावरण पर्यावरण को संतुलित बनाए रखने में बहुत योगदान देता है।पृथ्वी पर सभी जैविक और अजैविक चीजों जैसे की पेड़, झाड़ियों, बगीचा, नदी, झील, हवा, धूप की किरण आदि शामिल है। स्वस्थ वातावरण प्रकृति के संतुलन को बनाए रखता है और साथ ही साथ पृथ्वी पर सभी जीवित चीजों को बढ़ने, पोषित और विकसित करने में मदद करता है। लेकिन आज के समय के अनुसार औद्योगिक क्षेत्र की उन्नति के परिणाम स्वरूप मानव निर्मित प्रदूषण को कई प्रकार से विकृत कर रहा है जो कि प्राकृतिक के संतुलन को बिगाड़ कर रख रही है। यदि कोई भी व्यक्ति प्रकृति के अनुशासन को खराब करते हैं तो ये पूरे वातावरण के माहौल को जैसे की वायु-मंडल, जलमंडल और स्थलमंडल को अस्तव्यस्त करती है। मानव निर्मित वातावरण इस पर्यावरण को काफी हद तक प्रभावित करता है जिसे हम सभी को पेड़ पौधे लगा कर बचना है और लोगों को वृक्ष लगाने के लिए उकसाना है।प्राकृतिक वातावरण को घटक संसाधन के रूप में उपयोग किया जाता है हालाँकि कुछ बुनियादी भौतिक जरूरतें और जीवन के उद्देश्य को पूरा करने के लिए इंसान द्वारा इसका शोषण किया जाता है। पर्यावरण में वायु प्रदूषण, जल प्रदूषण, मृदा प्रदूषण आदि को रोकने के लिए कठोर से कठोर नियम लागू करना चाहिए और सभी आम जनता को इधर उधर अपशिष्ट डालने में रोक लगानी चाहिए।


पर्यावरण की परिभाषा

पर्यावरण की परिभाषा इस प्रकार है - जे.एस. रॉस के अनुसार=  पर्यावरण या वातावरण वह वाह्य शक्ति है जोअस्तन धारी जिवो प्रभावित करती हैं।

 डगलस एंव हालैण्ड के अनुसार =  पर्यावरण वह शब्द है जो समस्त वाह्य शक्तियों ,प्रभावों और परिथतियों का सामूहिक रूप से वर्णन करता है जो जीवधारी के जीवन ,स्वभाव ,व्यवहार तथा अभिवृद्धि , विकास तथा प्रौढता पर प्रभाव डालता है ।

 हर्स, कोकवट्स के अनुसार पर्यावरण इन सभी बाहरी दशाओं और प्रभावों का योग है तो प्राणी के जीवन तथा विकास पर प्रभाव डालता है।


 डॉ डेविज के अनुसार मनुष्य के सम्बन्ध में पर्यावरण से अभिप्राय भूतल पर मानव के चारों ओर फैले उन सभी भौतिक स्वरूपों से है। जिसके वह निरन्तर प्रभावित होते रहते हैं।” “ पर्यावरण प्रभावों का ऐसा योग है जो किसी जीव के विकास एंव प्रकृति को परिस्थितियों के सम्पूर्ण तथ्य आपसी सामंजस्य से वातावरण बनाते हैं।


 ए.बी.सक्सेना के अनुसारपर्यावरण शिक्षा वह प्रक्रिया है जो पर्यावरण के बार में हमें संचेतना, ज्ञान और समझ देती है । इसके बारे में अनुकूल दृष्टिकोण का विकास करती है और इसके संरक्षण तथा सुधार की दिशा में हमे प्रतिबद्ध करती हैं।


उपर्युक्त परिभाषाओं के अध्ययन से स्पष्ट हो जाता है कि जो कुछ भी हमारे चारों ओर विद्यमान है तथा यह हमारी रहन-सहन दषाओं तथा मानसिक क्षमताओं को प्रभावित करता है, पर्यावरण कहलाता है। पर्यावरण में वे सभी परिस्थितियाँ भी आती हैं, जो हमारे जीवन पर प्रभाव डालती हैं। हमारा घर, मौहल्ला, गाँव, शहर सभी हमारे पर्यावरण के अंग हैं क्योंकि वे सभी हमारे जीवन पर प्रभाव डालते हैं। ‘पर्यावरण’ मानव जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में समाविष्ट हैं।

पर्यावरण एक व्यापक शब्द है। यह उन संपूर्ण शक्तियों, परिस्थितियों एवं वस्तुओं का योग है जो मानव को परावृत करती है तथा उसके क्रियाकलापों को अनुषासित करती है।

पर्यावरण के प्रकार

वर्तमान समय में मनुष्य प्रदूषण के प्रकार स्वयं प्रदूषण का स्त्रोत है, क्योंकि प्रकृति में कोई भी ऐसी विधि नहीं पाई जाती है जो कि मनुष्य के द्वारा निर्मित पदार्थों को अपघटित कर सके, और उन तत्वों को प्रकृति के चक्र में कर देवें। यह पदार्थ इसी रूप में पाये जाते हैं और जो भी वह क्षति पहुँचाना चाहते हैं, वह क्षति पहुँचा देते हैं या हानि उत्पन्न कर देते हैं, जब तक कि वह विस्तारित या तनुकृत न हो जावे अतः प्रदूषण निम्न प्रकार के होते हैं - 

वायु प्रदूषण, 

जल प्रदूषण 

मिट्टी/मृदा प्रदूषण 

समुद्री प्रदूषण 

ध्वनि प्रदूषण 

तापीय प्रदूषण 

आणविकीय संकट

जैव प्रदूषण 

ठोस अपषिष्ट प्रदूषण।

पर्यावरण के विभिन्न अंग

1. स्थल मण्डल (lithosphere)- जल -तल से ऊँचा उठा हुआ भाग स्थल मण्डल है और इसके अन्तर्गत धरातल का लगभग 29 से 30 प्रतिशत भाग आता है । इस स्थल में तीन परतें है । पहली परत भू-पृष्ठ की है और धरती से इस परत की लगभग गहराई 100 कि.मी. है। इस परत में विभिन्न प्रकार की मिट्टियॉ  समाई हुई है। तथा इस भाग का औसत धनत्व लगभग 2.7 है । दूसरी परत को उपाचयमण्डल कहते है, जिसकी गहराई स्थल मण्डल के नीचे 200 कि.मी. तक होगी है तथा जिसमें सिलिकन और मैगनीशियम की प्रधानता है और इसका औसत धनत्व 3.5 ऑका गया है।  तीसरी परत को परिणाम मण्डल कहते है, जो पृथ्वी का केन्द्रीय मण्डल है और कठोर धातुओं से बना हुआ है, जिसमें निकल व लोहे की प्रधानता है । 

2. जल मण्डल (hydrosphere)- पृथ्वी का समस्त जलीय भाग जलमण्डल कहलाता है , जिसमें सभी सागर व महासागर सम्मिलित है । भूपटल के 71% भाग पर जल एंव 29% भाग पर थल का विस्तार है। पृथ्वी की समह पर क्षेत्रफल लगभग 51 करोंड वर्ग किलोमीटर है। जिसमें 36 करोंड वर्ग कि.मी. पर जल का विस्तार है। 


3. वायु मण्डल (Atmosphere)- पृथ्वी के चारों ओर वायु का आंवरण है, जिसे वायुमण्डल कहा जाता है। पृथ्वी की गुरुत्वाकर्षण शक्ति के कारण वायु का यह धेरा पृथ्वी को जकड़े हुए है, और धरातल से इसकी ऊंचाई साधारणतः 800 किलोमीटर मानी जाती है, परन्तु खोज के पश्चात यह ऊंचाई 1300 किलोमीटर ऑकी गयी है। वायु मण्डल में भी अनेक परत होती है।

पर्यावरण के तत्व

पर्यावरण के तत्वों को दो समूहों में विभक्त किया जाता है। (अ) अजैव तत्व (Abiotic Elements) तथा (ब) जैव तत्व (Biotic Elements)। अजैव तत्वों में जलवायु, स्थल, जल, मृदा, खनिज एवं चट्टान तथा भौगोलिक स्थिति प्रमुख है। जैव तत्वों में पौधे और जीव-जन्तु प्रमुख है।

1. अजैव तत्व समूह 

जलवायविक कारक (Climatic Factors)- सूर्य, प्रकाश एवं ऊर्जा, तापमान, हवा, वर्षा, आर्द्रता, वायुमण्डलीय गैस आदि।

स्थलजात कारक (Topographic Factors)- उच्चावच, ढाल, पर्वत, दिषा आदि।

जल स्रोत (Water Bodies)- सागर, झील, नदी, भूमिगत जल आदि।

मृदा (Soils)- मृदा रूप, मृदा-जल, मृदा-वायु आदि।

खनिज एवं चट्टानें (Rocks and Minerals)- धात्विक एवं अधात्विक खनिज, ऊर्जा खनिज एवं चट्टानें।

भौगोलिक स्थिति (Geographical Locations)- तटीय, मध्यदेषीय, पर्वतीय आदि।

2. जैव-तत्व समूह

इसमें वनस्पति, जीव-जन्तु, मानव एवं सूक्ष्म जीव आते है। पर्यावरण के जैव एवं अजैव तत्व समूह अपनी विशेषता के अनुसार पर्यावरण का निर्माण करते हैं। चूंकि ये आपस में गुंथे हुए हैं अत: इनमें होने वाले परितर्वनों का व्यापक प्रभाव पड़ता है। 


पर्यावरण प्रदूषण के प्रमुख कारण

  पर्यावरण प्रदूषण के प्रमुख कारण 🌫️ 1. वायु प्रदूषण (Air Pollution) वायु प्रदूषण आज के समय की सबसे बड़ी समस्याओं में से एक बन चुका है। गाड...